जेल में आजम, बाहर ट्रस्ट की सर्जरी! जौहर ट्रस्ट को मिली नई कमान

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

उत्तर प्रदेश की सियासत से जुड़ी एक बड़ी और symbolic development सामने आई है। रामपुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान, उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है।

यह फैसला सिर्फ एक resignation नहीं, बल्कि कानूनी दबावों और राजनीतिक हालात के बीच ट्रस्ट को बचाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

नई कार्यकारिणी, वही परिवार – New Faces, Old Roots

इस्तीफे के साथ ही जौहर ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया गया है।

  • निकहत अफलाक (आजम खान की बहन) → अध्यक्ष
  • मोहम्मद अदीब आजम (बड़े बेटे) → सचिव
  • नसीर अहमद खान (SP MLA)संयुक्त सचिव
  • मुश्ताक अहमद सिद्दीकीउपाध्यक्ष
  • जावेद उर रहमान खानकोषाध्यक्ष

इस बदलाव की आधिकारिक पुष्टि मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एस.एन. सलाम ने की है।

जौहर ट्रस्ट: कभी ड्रीम प्रोजेक्ट, आज लीगल भूल-भुलैया

जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की स्थापना मुलायम सिंह यादव, आजम खान, अमर सिंह और जयाप्रदा जैसे दिग्गज नेताओं ने मिलकर की थी।
2013 में इसे NCMEI (National Commission for Minority Educational Institutions) से मान्यता मिली थी।

यह ट्रस्ट सिर्फ यूनिवर्सिटी ही नहीं, बल्कि रामपुर के पब्लिक स्कूल्स का भी संचालन करता है। लेकिन समय के साथ यह ड्रीम प्रोजेक्ट कानूनी केसों के जाल में उलझता चला गया।

30 केस, 90 FIRs और एक बड़ा दबाव

सूत्रों के मुताबिक, जौहर ट्रस्ट पर करीब 30 केस। आजम खान पर लगभग 90 मुकदमे। इनमें से 30 मामले सीधे जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन से जुड़े हैं।

यूनिवर्सिटी के लिए खरीदी गई 1500 बीघा जमीन की जांच पिछले 5 साल से चल रही है। इन जांचों का असर सीधे students और academic functioning पर भी पड़ा है।

जेल में आजम, बाहर ट्रस्ट को बचाने की कवायद

आजम खान और अब्दुल्ला आजम इस समय डबल पैन कार्ड केस में रामपुर जेल में बंद हैं। ट्रस्ट पर किसानों की जमीन कब्जाने के भी आरोप हैं।
ऐसे में ट्रस्ट की credibility और day-to-day functioning को बचाने के लिए आजम खान का पद छोड़ना compulsion बन गया

खान ट्रस्ट से बाहर हैं, लेकिन ट्रस्ट आज भी उनके ही परिवार के भीतर घूम रहा है।

Political Signal क्या है?

यह फैसला साफ इशारा करता है कि Legal survival – Political ego, SP के लिए भी यह मैसेज है कि आने वाले वक्त में soft रणनीति अपनाई जा सकती है। और जौहर ट्रस्ट के लिए यह damage control mode की शुरुआत है।

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